28 वर्षीय महिला झीतू को गंभीर स्थिति में उसके परिजन देवराज हॉस्पिटल लेकर आए। मरीज की त्वचा पर लाल चकत्ते, छाले और त्वचा छिलने जैसी अवस्था थी। साथ ही, मुँह और होंठों के अंदर दर्दनाक घाव व छाले बने हुए थे, जिससे खाना-पीना मुश्किल हो गया था।
आपातकालीन जाँच के बाद डॉक्टरों ने निदान किया कि मरीज को Stevens–Johnson Syndrome (SJS) है, जो एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा एलर्जिक रिएक्शन है।
देवराज हॉस्पिटल की Medicine Department और Dental Department की संयुक्त टीम ने तुरंत जीवनरक्षक उपचार शुरू किया—
मरीज को ICU में भर्ती किया गया।
IV Fluids और दवाइयों से तरल और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखा गया।
संक्रमण नियंत्रण के लिए एंटीबायोटिक्स और supportive दवाइयाँ दी गईं।
दर्द नियंत्रण और फंगस-रोधी उपचार शुरू किया गया।
Dental Department ने मुँह के छालों की विशेष देखभाल की, मुँह की सफाई और घावों के उपचार के लिए स्थानीय दवाएँ दीं, ताकि मरीज को खाने-पीने में राहत मिले।
Medicine Department ने पूरी बॉडी की स्थिति पर निगरानी रखी, ब्लड टेस्ट और अंगों की कार्यक्षमता (लिवर, किडनी) पर लगातार नज़र रखी।
डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि Stevens–Johnson Syndrome की स्थिति बेहद गंभीर होती है और इसमें बहु-विभागीय (Multi-disciplinary) इलाज की आवश्यकता होती है।
देवराज हॉस्पिटल की टीम की समय पर देखभाल, Medicine और Dental विभाग के संयुक्त प्रयासों तथा नर्सिंग स्टाफ की सतर्क निगरानी से झीतू को जीवनरक्षक इलाज मिला और सुधार की उम्मीद बनी।
