20 वर्षीय युवक अरविंद यादव को उसके परिजन आपातकालीन हालत में देवराज हॉस्पिटल लेकर आए। जब वह अस्पताल पहुँचा, उस समय उसका चेहरा अत्यधिक पीला था, सांस लेने में कठिनाई हो रही थी और वह पूरी तरह से बेहोश था।
आपातकालीन विभाग की टीम ने तुरंत जाँच की और पाया कि उसका हीमोग्लोबिन केवल 1.3 ग्राम/डीएल है, जो जीवन के लिए बेहद ख़तरनाक स्तर है।
देवराज हॉस्पिटल की इमरजेंसी टीम ने बिना देर किए उसका इलाज शुरू किया।
सबसे पहले ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया।
नस में बड़ी कैन्युला डालकर तुरंत तरल पदार्थ और दवाइयाँ चढ़ाई गईं।
खून (PRBC – पैक्ड रेड ब्लड सेल्स) का इंतज़ाम कर तुरंत ब्लड ट्रांसफ्यूज़न शुरू किया गया।
साथ ही, डॉक्टरों ने उसकी हालत का कारण समझने के लिए कई जाँचें भी करवाईं —
सीबीसी और परिफेरल स्मीयर,
लिवर और किडनी की जाँच,
खून जमने की क्षमता की जाँच,
और अन्य टेस्ट।
इलाज के दौरान डॉक्टर और नर्स उसकी हर साँस, नब्ज़ और ब्लड प्रेशर पर लगातार नज़र रख रहे थे। परिजनों को उसकी गंभीर स्थिति के बारे में समझाया गया और यह भी बताया गया कि आगे और जाँच के बाद ही खून की कमी का असली कारण स्पष्ट होगा।
देवराज हॉस्पिटल की टीम की तत्परता और प्रयासों से अरविंद को जीवनरक्षक इलाज मिला और उसके स्वस्थ होने की उम्मीद बनी।
